अगर जा रहे है वरुण की ‘जुड़वा-2’ देखने तो पहले पढ़ ले ये फिल्म रिव्यू

वरुण धवन ने दोनों किरदारों के ऊपर बढ़िया प्रयोग किया है और प्रेम के साथ-साथ राजा के किरदार को सहज तरीके से निभाया है। जैकलीन फर्नांडिस और तापसी पन्नू को फिल्म में ग्लैमरस अवतार में दर्शाने की कोशिश की गई है, जिसे दोनों ने अच्छे से किया भी है। फिल्म के सह कलाकारों में पवन मल्होत्रा अनुपम खेर, सचिन खेड़कर, राजपाल यादव और बाकी किरदारों ने भी ठीक-ठाक अभिनय किया है।

फिल्म की कहानी पहली वाली जुड़वा की याद तो दिलाती है, लेकिन जितना मजा सलमान की फिल्म में आया था वैसा वरुण की फिल्म में देखने को नहीं मिला। फिल्म में बेहद घिसे-पिटे जोक्स हैं, बिना लॉजिक वाले सीन हैं। इस वजह से फिल्म देखने के बावजूद चेहरे पर हंसी नहीं आती। कहानी और खास तौर से इस्तेमाल किए गए जोक्स अच्छी क्वालिटी के हो सकते थे।

कहानी-

एक स्मगलर चार्ल्स (जाकिर) के साथ शुरू होती है जो एक अमीर बिजनेसमैन मल्होत्रा ( सचिन खेड़कर) के हीरों से भरे बैंग के पीछे पडा है। स्मगलर, मल्होत्रा के नवजात जुड़वा बच्चों में से एक बेटे को लेकर गायब हो जाता है। यह बच्चा मुंबई के रेलवे ट्रैक पर पाया जाता है जिसे एक महिला (काशी) पाल-पोसकर बड़ा करती है। इसका नाम राजा (वरुण धवन) है। उसका दोस्त नंदू (राजपाल यादव) है।

राजा का जुड़वा भाई प्रेम (वरुण धवन) लंदन में अपने माता-पिता के साथ रहता है. वह पूरी तरह से जेंटलमैन है। जबकि मुंबई की गलियों में पला-बढ़ा राजा टिपिकल टपोरी स्टाइल में मिलता है। पहली वाली जुड़वा में भी ऐसा ही देखने को मिला था। कहानी में तब मोड़ आता है जब किसी तरीके पप्पू पासपोर्ट (जानी लीवर) की वजह से राजा लंदन जाता है। प्रेम-राजा का मिलन होता है, कहानी में क्या-क्या ट्विस्ट और टर्न्स आते हैं यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

jan sangathan

Media/News Company

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