भारत के इन चमकत्कारिक मंदिरो के रहस्य आपको कर देंगे हैरान, जानें..

नई दिल्लीः हिंदु धर्म में मंदिर और गुफाओं का विशेष महत्व है। ये किसी ना किसी पौराणीक कथाओं पर आधारित है। इनमे छुपे रहस्य का साइंस भी आज तक पता नही लगा पाया है। तो आइए चलिए आपको कुछ ऐसे ही रहस्यों के बारें में बताते है-

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केदारनाथ का मंदिर – केदारनाथ मंदिर के बारें में कहा जाता है कि इस पर कभी कोई परेशानी नही आती है। यह हमेशा से जैसा का तैसा खड़ा है। इस मंदिर का निर्माण पांडवो ने किया था। तथा इसका जीर्णोद्धार शंकराचार्य के बाद राजा भोज ने करवाया था। जुलाई 2013 में केदारनाथ में जो जलप्रलय हुई थी उसमें लगभग 10,000 लोग मौत की नींद में सो गए थे लेकिन मंदिर का बाल भी बांका नहीं हुआ।


रामेश्वरम का मंदिर – रामेश्वरम में भगवान श्रीराम ने शिवलिंग की स्थापना की थी। इसके बारें में कहा जाता है कि आज भी रामेश्व रम में समुद्र अपने पूरे अदब और संयम के साथ ही रहता है। यहां समुद्र कभी उफान पर नहीं आता है। यहां पर श्रीरामेश्वरमजी का मंदिर 1,000 फुट लंबा है। इसके अलावा यह 650 फुट चौड़ा तथा 125 फुट ऊंचा है। इस मंदिर में प्रधान रूप से एक हाथ से भी कुछ अधिक ऊंची शिवजी की लिंग मूर्ति स्थापित है।


ज्वालादेवी का मंदिर – इस मंदिर में अनंत काल से ज्वाला निकल रही है इसी कारण इसे ज्वालादेवी का मंदिर कहते हैं। देवी के शक्तिम पीठों में से एक इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां पर माता सती की जीभ गिरी थी। इसलिए यहां पर ज्वा ला निकलती रहती है। इसके अलावा यहां पर एक और चमत्कार है। मंदिर परिसर के पास ही एक जगह है ‘गोरख डिब्बी’ जो कि एक जल कुंड है। इस कुंड में गर्म खौलता हुआ पानी है, जबकि छूने पर कुंड का पानी ठंडा लगता है।


पुरी का जगन्नाथ मंदिर – कहा जाता है कि इस मंदिर के गुंबद की छाया नहीं बनती है। इसके अलावा इस मंदिर के ऊपर लगा झंडा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है। इसके अलावा इसके गुंबद के आसपास कोई पक्षी नहीं उड़ता है।


रामसेतु के पत्थर – पूरी दुनिया में एकमात्र रामसेतु का स्थान ऐसा है। जहां के पत्थर पानी में तैरते हैं। ऐसी मान्यता है कि रामसेतु या नलसेतु को बनाने के लिए जिन पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था वे पत्थर पानी में फेंकने के बाद समुद्र में नहीं डूबे, बल्कि पानी की सतह पर ही तैरते रहे।


कालभैरव का मदिरा पीना- मध्यप्रदेश के उज्जैन में कालभैरव के मंदिर में उन्हें मदिरा पिलाई जाती है। क्योंकि यहां भगवान कालभैरव को मदिरापान कराने की परंपरा हैं। इसकी वैज्ञानिक जांच भी हुई कि आखिर ये मदिरा कहां जाती है, लेकिन कुछ नहीं पता चल सका।


मैहर माता का मंदिर- जबलपुर जिले में मैहर की माता शारदा का प्रसिद्ध मंदिर है। इसके बारे में कहा जाता है कि जब यह मंदिर बंद हो जाता है तब अंदर से घंटी और पूजा करने की आवाज आती है। मान्याता है कि मां का भक्त आल्हा अभी भी यहां पूजा करने आता है, लेकिन मंदिर खोलने पर कोई नहीं दिखाई देता।

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jan sangathan

Media/News Company

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