सत्त स्वरूप से जुड़ जाना ही सत्संग है: स्वामी विशेषानंद जी

माँ अन्नपूर्णा मन्दिर में दो दिवसीय ‘अलख ज्यन्ति’ महोत्सव का सफलातपूर्वक आयोजन

जालंधर: अलख आश्रम की तरफ से ‘अलख ज्यन्ति’ के अवसर पर जालंधर स्थित मां अन्नपूर्णा मन्दिर में दो दिवसीय समारोह का आयोजन स्वामी श्री विशेषानंद जी के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

इस अवसर पर स्वामी श्री विशेषानंद जी ने अपने वचनों में कहा कि सत्संग की महिमा केवल बातों तक सीमित नहीं इसका फल प्रत्यक्ष है। यज्ञ,तप,दान तथा कीर्तन का फल शायद कब मिले परन्तु सत्संग का फल अवश्य मिलता है।

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स्वामी जी ने कहा कि प्रभु का नाम एक है। जो भी हम जिह्वा से बोलते हैं, कानों से सुनते हैं, आंखों से देखते हैं वह परमात्मा के सिफाती (गुणवाचक) नाम तो हो सकते हैं परन्तु परमात्मा का यथार्थ नाम नहीं, स्वामी जी ने आगे कहा कि सत्त स्वरूप यानि अपने आप को जानना ही सतसंग है और जिसे सिर्फ समय के पूर्ण सदगुरू से ही जाना जा सकता है। इस मौके पर शहरवासियों व दूरों दराज से आई संगत ने बढ़ चढक़र भाग लिया।

jan sangathan

Media/News Company

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